Posts

Showing posts from November, 2019

कविता

Image
कविता  ---                                                                                                            कैसा होगा तू रूप तेरा,      हे ईश तुझे क्या कह दूं मैं यदि कहता जगदाधार तुझे,             तो कहीं गलत न कह दूं मैं ।।०१ ये परिवर्तन का पुतला मेरा , कहीं हो जाय न गुम ये कृपा करना। सांसारिक तृष्णा माया का, कहीं तृषित न हो ये दया करना।।०२ नव चेतना हो चंचल मन में, हिरदय में सुभावना उग आएं । जीवन ज्योति असीम जले, पै जले जस दीपक ज्योतिर्माए।। रहें अपने कर्तव्य में लीन, बढ़ें शिखरो को, तमन्ना पुराएं। कहत गनेशी या नववर्ष की मन से सबको अति शुभकामनाएं।।०३ जानत है मानत नहीं, कथा कहत है नित्त । भवसागर के बीच ...