लोग क्या कहेंगे?

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वह चाहता था
सातवें आसमान की सैर करना
पर बिना ताकत लगाए,
दिखाना चाहता था
अपना उदात्त गौरव
जब करने का समय आता,
तो वह सोचने लगता
लोग क्या कहेंगे?

छुपाता था खामियों  को
वह अपने ही परों में,
'कुछ तो लोग कहेंगे'
वह जानता था इसे
लोगों को समझा भी देता था,
पर 'ऊँट जब भी आता पहाड़ के नीचे'
सोचने लगता
लोक क्या कहेंगे?

एक दिन जब भेंट हुई,
जाँबाज से
शीत-युद्ध शुरू हुआ
बाज की हवा गायब,
'आँगन टेढ़ा है' ,
बड़ी दृढ़ता से कहा उसने
कहता था सबको
जैसे हर बार
पर नहीं गली दाल इस बार उसकी
सच कहूँ तो वही गल गया ,
सबकी नजर में नहीं
बस अपनी नजर में ।

नहीं उड़ता हवा में वह अब
किसी को नीचा दिखाने
के लिए,
वह समझ गया
कोई कुछ नहीं कहता-वहता बस देखता है
कौन ऊपर है कौन नीचे,
अब वह नहीं सोचता
लोग क्या कहेंगे ।

                       
                   - जी•एल•'चित्रकूटी'

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