*नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को , मेरी इस यथार्थ-परक कविता के माध्यम से ----
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आना-जाना लगा रहेगा,
अटल-नियम यह सृष्टि का है ।
अफरा-तफरी के इस युग में,
मुद्दा एक समष्टि का है ।।

साक्षरता का बाना लेकर ,
निकले थे हम भेद मिटाने ।
अक्षर स्वयं निरक्षर होकर,
कूटनीति के बुनता ताने ।।

पढ़े-लिखे ही कट्टर देखे,
कह दूँ यदि सच्चाई ।
अनपढ़- हिन्दू,अनपढ़- मुस्लिम ,
सब थे भाई-भाई ।।

मन से अपने-अपने यदि तुम,
अब कटु भाव मिटा लो ।
'चित्रकूटी' तब स्वागत सब का,
मिल नव-वर्ष मना लो ।। 

              - जी•एल•'चित्रकूटी'

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