धूलिकोत्सव के झरोखे से --
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यांत्रिक होते जाते हम,
है पक्ष बुद्धि का हावी।
यदि भावाभाव रहा तो,
क्या होगी समस्या भावी?
चिंतन करते क्या हम सब,
इस विषय गहनतर को ले?
इव धूमकेतु जो बनकर ,
आकस्मिक तूफां डोले।।
देखा तुमने कितनों को,
जो रूप मूर्त में आया?
होली की शुभकामनाएं,
झोली में भर कर लाया?
कहते उसको रंगोत्सव,
जिसमें विभिन्न रंग हो पर।
जीवन का एक अमिट रंग,
मानवता ना हो कमतर।।
संकल्पित हों अब हम सब,
आओ मिलकर होली में।
ना मिटे रंग वह गहरा,
भर जाए हमारी टोली में।।
-- जी.एल.'चित्रकूटी'
धूलिकोत्सव के झरोखे से --
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यांत्रिक होते जाते हम,
है पक्ष बुद्धि का हावी।
यदि भावाभाव रहा तो,
क्या होगी समस्या भावी?
चिंतन करते क्या हम सब,
इस विषय गहनतर को ले?
इव धूमकेतु जो बनकर ,
आकस्मिक तूफां डोले।।
देखा तुमने कितनों को,
जो रूप मूर्त में आया?
होली की शुभकामनाएं,
झोली में भर कर लाया?
कहते उसको रंगोत्सव,
जिसमें विभिन्न रंग हो पर।
जीवन का एक अमिट रंग,
मानवता ना हो कमतर।।
संकल्पित हों अब हम सब,
आओ मिलकर होली में।
ना मिटे रंग वह गहरा,
भर जाए हमारी टोली में।।
-- जी.एल.'चित्रकूटी'
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