प्रेमिका के प्रति एक विशुद्ध प्रेमी की भावना----
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खोए रहते हैं हम रात-दिन आजकल,
तेरी यादों में क्या हम बताएं सनम।
आप करते हैं बातें ये उस पार की,
हम तो रहते सदा आप ही में मगन।
ईश से अब हमारी तमन्ना रही,
छांव में आप हों धूप में हम जिएं।
खुशबू फूलों में जैसे रहे हिल-मिली,
हम रहें आप में यूं ही खुद भूलकर।
कितनी है जिंदगी ये पता है कहां,
क्या कहें साथ रहना है कब तक यहां?
हामी थोड़ी सी गर आपकी मिल गई,
जानूंगा आज हमको खुदा मिल गया।
बात कहनी थी जो अब वो ये है सुनो,
इस धरा पर हूं जब तक रहूंगा तेरा।
-- जी.एल. की कलम से!
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दिनांक/दिन - 18/03/2020, बुधवार!

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