गीत

 कैसे बेटी व्याहेंगे अब भगवान भी हमसे रूठ गए!

ये दुनिया ज़माना क्या कहना जब राम हमारे छूट गए! २


       जीवन ही गरीबों का होता,

       जोड़े कोई खाए कोई!

       दर दर की ठोकर खाएं हम,

        पर भरे ख़जाना और कोई!!

घुट घुट जीने की आदत है दर दर पे भटकना काम हुए।


      मायन का दिन तो बीत गया,

        बारात है कल आने वाली!

        ये पहाड़ हि दुख का टूट पड़ा,

        जब बेटी है जाने वाली!!

क्या कह के बारात विदा कर दूं क्या कह दूं कि हम तो लुट ही गये


          ये जीवन भी क्या जीवन है,

          पल - पल कटते रोते- रोते!

          है पहली शर्त ग़रीबी की,

           चलते जाओ खोते-खोते !!

खुद होम भी हमको होना है जलकर हम ही तो ख़ाक भये!

ये दुनिया ज़माना क्या कहना जब राम हमारे छूट गये..

कैसे बेटी... 




       

 


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